हम चीज़ हैं बड़े काम की, यारम...
हम चीज़ हैं बड़े काम की, यारम
हमें काम पे रख लो कभी, यारम
हम चीज़ हैं बड़े काम की, यारम
हो सूरज से पहले जगाएंगे...
और अखबार की सब सुर्खियां
हम गुनगुनाएंगे...
पेश करेंगे गर्म चाय फिर
कोई खबर आई ना पसंद
तो एंड बदल देंगे...
हो मुंह खुली जम्हाई पे
हम बजाएं चुटकियां
धूप ना तुमको लगे
खोल देंगे छतरियां
पीछे-पीछे दिन भर
घर दफ्तर में ले के चलेंगे हम...
तुम्हारी फाइलें, तुम्हारी डायरी
गाड़ी की चाभियां, तुम्हारी ऐनकें
तुम्हारा लैपटॉप, तुम्हारी कैप, फोन
और अपना दिल, कंवारा दिल...
प्यार में हारा, बेचारा दिल...
ये कहने में कुछ रिस्क है, यारम
नाराज ना हो, इश्क है, यारम
हो रात सवेरे शाम या दोपहरी
बंद आंखों में लेके तुम्हें
ऊंघा करेंगे हम...
तकिए चादर महकते रहते हैं
जो तुम गए...
तुम्हारी खुशबू सूंघा करेंगे हम...
ओ... जुल्फ में फंसी हुई
खोल देंगे बालियां...
कान खिंच जाएं अगर
खा लेंगे मीठी गालियां...
चुनते चलें पैरों के निशां
कि उन पर और ना पांव पड़ें...
तुम्हारी धड़कनें, तुम्हारा दिल सुने
तुम्हारी सांस सुने, तुम्हारी कंपकंपी
ना गजरे बुने, जूही, मोगरा तो
कभी दिल, हमारा दिल
प्यार में हारा बेचारा दिल
हमारा दिल, हमारा दिल
प्यार में हारा बेचारा
दिल... दिल... दिल...
गीतकार: गुलजार
गायक: सुनिधि चौहान, क्लिंटन सेरेजो
फिल्म: एक थी डायन (2013)।


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