जानी! जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते..
जिनकी आवाज ही इस देश में उनकी पहचान है. किसी ने भी नहीं सोचा था कि मुंबई पुलिस का एक साधारण सा सब इंस्पेक्टर अपनी अदाकारी और धांसू डायलॉग डिलीवरी के कारण दर्शकों के दिलों पर दुनिया से चले जाने के बाद भी राज करेगा. पाकिस्तान के बलुचिस्तान प्रांत में पैदा होने वाले कुलभूषण पंडित को अब राजकुमार के नाम से जाना है. कुलभूषण 40 के दशक में मुंबई पुलिस में शामिल हुए थे. बॉलीवुड में उनकी सफर की शुरुआत 1952 में 'रंगीली' नाम की फिल्म से हुई थी.
बॉलीवुड के लिए ये सौभाग्य की बात है कि कुलभूषण उर्फ राजकुमार के रूप में जब वे डायलॉग बोलते थे ताे दुश्मन के छक्के छूट जाते थे. साथ ही सिनेमाघरों में सन्नाटा पसर जाता था, जो उनका डायलॉग खत्म होने के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से टूटता था. आज बॉलीवुड के इस सितारे की पुण्यतिथि उन्हें हार्दिक श्रद्घाजंलि. यहां हम उनके बोले गए कुछ डॉयलॉग साझा कर रह है...
(8 अक्टूबर 1926 – 3 जुलाई 1996)
पाकीजा
00 आपके पांव देखें, बहुत हसीन हैं... इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा... मैले हो जाएंगे...
00 जानी! जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते..
00 जानी! ये बच्चों के खेलने की चीज नहीं... हाथ कट जाए तो खून निकल आता है
तिरंगा
00 अपना तो उसूल है... पहले मुलाकात, फिर बात और जरूरत पड़ी तो फिर लात...
00 ना तलवार की धार पर, ना गोलियों की बौछार से, बंदा डरता है तो सिर्फ परवरदिगार से...
00 हमारी जबान भी हमारी गोली की तरह दुश्मनों से सीधे बात करती है...
00 हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते, हम आंखें ही चुरा लेते हैं...
00 गेंडास्वामी हम तुम्हें वो मौत देंगे, जो न तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी और न ही किसी मुजरिम ने सोची होगी...
मरते दम तक
00 दादा तो दुनिया में सिर्फ दो हैं... एक ऊपर वाला और दूसरे हम...
00 ये तो शेर की गुफा है... यहां अगर तुम्हें करवट भी ली तो समझो मौत को बुलावा दिया...
00 राणा की शतरंज का घोड़ा ढाई घर नहीं चलता सीधे राजा को मारता है...
00 इस दुनिया के तुम पहले और आखिरी बदनसीब कमीने होगे जिसकी न तो अर्थी उठेगी और न किसी किसी कंधे का सहारा मिलेगा... सीधी चिता जलेगी...
00 हम तुम्हें ऐसी मौत मारेंगे कि तुम्हारी आने वाली नस्लों की नींद भी उस मौत के खौफ से उड़ जाएगी...
00 बोटियां नोचने वाले गीदड़, गला फाड़ने से शेर नहीं बन जाता...
00 हम कुत्तों से बात नहीं करते...
सौदागर
00 ठाकुर राजेश्वर सिंह इतिहास बताता नहीं, इतिहास लिखता है, इतिहास बनाता है...
00 जानी... हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा...
00 काश की तुमने हमें आवाज दी होती तो हम मौत की नींद से उठकर चले आते...
बेताज बादशाह...
00 औरों की जमीन खोदोगे तो उसमें मिट्टी और पत्थर मिलेंगे और हमारी जमीन खोदोगे तो उसमें हमारे दुश्मनों के सर मिलेंगे...
00 आपने हमारे हाथ में ताश क्या दे दी... ये समझिये बाजी दे दी...
00 जब हम मुस्कुराते हैं तो दुश्मनों के दिल दहल जाते हैं...
00 हम अपने कदमों की आहट से हवा का रुख बदल देते हैं...
बुलंदी
00 हमको मिटा सके ये जमाने में दम नहीं... हमसे जमाना खुद है, जमाने से हम नहीं...
00 तुम्हारे औकात के जमींदार रोज सुबह हमारी हवेली पर सलाम करने आते हैं...










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