बदलापुरः हे ईश्वर ! इस फिल्म को सहने की शक्ति दो

कहते हैं कि अंत भला तो सब भला, लेकिन फिल्म बदलापुरः डोंट मिस द बिगनिंगपर यह कहावत फिट नहीं बैठती. फिल्म के बारे में सबसे खास बात यह है कि सिर्फ शुरुआत ही देखने लायक है. फिल्म की गाड़ी स्टेशन छोड़ते ही बेपटरी हो जाती है.


बॉलीवुड में बदले की तमाम फिल्में हैं. इनमें से कुछ फिल्में एक खास कालचक्र में पूरी होती थीं. ‌थियेटर में फिल्म देखते वक्त परदे पर अचानक उभरता था ‘20 साल बाद’. श्रीराम राघवन निर्देशित और वरुण धवन अभिनीत इस फिल्म का कालचक्र 15 सालों का है. एक बैंक डकैती के दौरान मुख्य चरित्र राघव (वरुण धवन) की पत्नी निशा (यामी गौतम) और बेटे की हत्या हो जाती है. दो बदमाश लायक (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) और हरमन (विनय पाटक) इस डकैती को अंजाम देते ‌हैं. डकैती के बाद लायक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देता है और हरमन पैसे लेकर फरार हो जाता है. दोनों ने डकैती के पैसों को शेयर बाजार में डालने का इनवेस्टमेंट प्लान पहले ही कर रखा था, ताकि जेल से जब भी छूटे तो जेब अच्छे-खासे पैसों से गर्म रहे.


फिल्म वरुण धवन की एंट्री के साथ ही बोझिल हो जाती है. एक ऐड मेकर राघव पत्नी और बेटे की हत्या के बाद समाज से कटकर पुणे से दूर एक कस्बे बदलापुर में एकाकी जीवन जीने चला जाता है. राघव बदलापुर ही क्यों जाता है, यह भी राघवन ठीक से नहीं समझा पाते. वास्तव में राघव‌किस तरह का बदला चाहता है, यह समझ से बाहर है. इंटरवल के बाद फिल्म पर निर्देशक की पकड़ छूट हो जाती है और इसे झेलना मुश्‍किल होने लगता है.


श्रीराम राघवन की बात करें तो क्राइम-थ्रिलर जॉनर की फिल्में बनाना उनका शगल है. इससे पहले उन्होंने बदले की ही एक कहानी पर एक हसीना थीनाम की कमाल की फिल्म रची थी. बदलापुर में राघवन ऐसा कोई कमाल नहीं दिखा पाते हैं. उनकी निर्देशकीय सोच पर भी तरस आता है. पत्नी और बच्चे की हत्या के बाद लायक के दूसरे साथी का नाम जानने के चक्कर में राघव उसकी (लायक) प्रेमिका का रेप करता है. पत्नी और बच्चे की हत्या के बाद एक व्यक्‍ति कैसे किसी का रेप कर सकता है. यह किस तरह का बदला था. फिल्म में ‌बेफजूल के किरदारों और अनचाहे यौन दृश्यों की भरमार है. दर्शकों के सामने एक ऐसा बदला परोसा गया है, जिसमें मुख्य ‌खलनायक आराम से जेल में मौज करता है और उससे जुड़े बाकी के लोगों की राघव हत्या कर देता है.


अभिनय के मामले में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मैदान मार लिया है. किरदार में डूबने के बाद जब उनकी अदाकारी बाहर निकलती है तो दर्शक तालियां पीटते नजर आते हैं. वरुण के अभिनय में वो आक्रामकता नजर नहीं आती जो बदले को लेकर होनी चाहिए. बदले का मतलब हथौड़ी से किसी की हत्या करना नहीं होता.


वहीं विकी डोनर जैसी रचनात्मक फिल्म से लॉन्च हुईं यामी गौतम न जाने किस आधार पर फिल्मों का चयन कर रही हैं. इस फिल्म में उनके किरदार का खेल दस मिनट के अंदर खत्म हो जाता है. वहीं इससे पहले आई उनकी फिल्म एक्‍शन जैक्‍शनमें वह खलनायक के घातक हमले का शिकार होकर अस्पताल में पड़ी रहती हैं. इस फिल्म को बनाने के पीछे श्रीराम राघवन क्या सोच रखते हैं यह तो नहीं पता, लेकिन यह एक ऐसी फिल्म थी जिसमें नायक धीरे-धीरे खलनायक में बदलने लगता है और खलनायक नायक में. इस तरह की कहानी समझ से परे लगती है. बहरहाल यही कहना है कि ईश्वर बदले की इस कहानी को सहन करने के लिए दर्शकों को धैर्य प्रदान करे.


बदलापुरः डोंट मिस द बिगनिंग
निर्देशकः श्रीराम राघवन
लेखकः श्रीराम राघवन, अरिजीत बिश्वास
कलाकारः वरुण धवन, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, यामी गौतम, हुमा कुरैशी, विनय पाठक, राधिका आप्टे
स्टारः 1/5

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