जीभर के हंसने का नाम है... एंटरटेनमेंट.. एंटरटेनमेंट.. एंटरटेनमेंट


काफी दिनों बाद एक ऐसी कॉमेडी फिल्म से रूबरू होने का मौका मिला, जिससे ध्यान नहीं भटकता। पिछली बार ऐसी देखी हुई किसी फिल्म के बारे में सोचता हूं तो रोहित शेट्टी की 'गोलमाल 3' याद आती है। यकीन मानिये फिल्म देखते समय आपको हंसने से फुसरत नहीं मिलेगी। फिल्म का नाम है 'एंटरमेंट'। जीभर के हंसना का जी हो तो इसे जरूर देखें।


काफी दिनों नहीं सालों बाद एक ऐसी फिल्म आई है जिसका केंद्रीय पात्र एक जानवर है। कुत्तों की 'गोल्डेन रिट्रीवर' प्रजाति का एक सदस्य फिल्म का केंद्रीय पात्र है, जिसका नाम एंटरटेनमेंट है। यह फिल्म कुत्ते और इंसान के आपसी रिश्तों कहानी है। इसी के बहाने वफादारी और ईमानदारी की बातें कही गई हैं। इस फिल्म की संकल्पना असाधारण है। एक कुत्ते के हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक बनने के बारे में सोचना काफी इनोवेटिव है। सारा लफड़ा और कॉमेडी इसी के बाद शुरू होती है।


कमीनेपन का रोल करना है तो अक्षय कुमार से बेहतरीन कलाकार कोई नहीं है। तमाम फिल्मों में उनकी हरकतों से यह साफ झलकता है। जॉनी लिवर को काफी दिनों बाद हबीबुल्ला के रोल में देखना सुखद रहा। कृष्णा कॉमेडी की इस भांग का असर बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुए हैं। मिथुन चक्रवर्ती, तमन्ना भाटिया, प्रकाश राज और सोनू सूद भी अपने-अपने पात्रों में अच्छे लगे हैं।


कृष्णा के खाते में आए संवाद काफी इनोवेटिव हैं। उनके संवाद अभिनेता-अभिनेत्री और फिल्म निर्माताओं के नाम पर आधारित हैं। जैसे 'आई रजनीकांट बीलीव दिस' और 'दिया मिर्जा लेकर भी ढूंढो तो एंटरटेनमेंट जैसा पूरे रितेश देशमुख में नहीं मिलेगा'। अक्षय के संवाद भी लोट-पोट कर देते हैं। जैसे कोई उनसे कहता है कि इसका कुछ तो हल निकालो तो वो कहते हैं कि किसान हूं जो हल निकालूं।


सचिन जिगर का म्यूजिक अच्छा है। 'जॉनी-जॉनी', मेरे वीर दी वेडिंग है' और 'तेरी महिमा अपरंपार.. हाऊ आई वॉन्डर ह्वाट यू आर जैसे गानों का मजाकिया अंदाज और फिल्मांकन कमाल है। तेरी महिमा अपरंपार... को आवाज देकर उदित नारायण ने भी काफी दिनों बाद वापसी की है। एक अच्छी के निर्देशक के रूप में साजिद-फरहाद के इस पहले और सार्थक प्रयास के लिए दिल से बहुत-बहुत बधाई।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

असली मस्तराम की तलाश

हैप्पी फीट: मछली की तरह तैरने वाला पक्षी पेंग्विन