मैं-तुम और बारिश...


तुम शायद नाराज थी मुझसे,
किस बात पर
मुझे मालूम नहीं...

तुम तो जानती हो
हमारे बीच रूठना-मनाना
सदियों से चलता चला आ रहा है...

मुझे तुम्हारा गुस्सा होना
और फिर तुम्हे मनाना
पसंद है...

आज जब तुम बादल बनकर
आसमान पर छाई
और बारिश बनकर
मुझ पर बरसी
तो पता है क्या हुआ...

मेरे साथ-साथ
पूरा इंदौर झूमने लगा...

प्रशांत

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