इंदोरी प्यार...

वो मेरे दिल में भराए इस तरा,
पोए में सेंव भराती जिस तरा...
उतर आए हमारे दिल में कुछ ऐसे,
उतरती कचोरी में चटनी जिस तरह...

उनकी याद में इस कदर अपन रोए,
सूरत हुई अपनी जैसे बिना प्याज के पोए...
आने से उनके चमके अपन कुछ ऐसे,
चमकते जोशी जी के दही-बड़े जिस तरा...

मेरे प्रपोजल पर तुम हओ तो केह दो,
करते हो हमसे लव तो केह दो...
वरना इश्क में तेरे टूट जाएंगे हम जालिम,
टूटे सराफे की चाट में पपड़ी जिस तरा...

हां बोल दे तू तो छप्पन पे आऊंगा,
तेरे मनपसंद पलासिया पे घर बनवाऊंगा...
तेरे नहीं से हो जाऊंगा बर्बाद मे,
प्रेस कॉम्प्लेक्स का राज एक्सप्रेस जिस तरा...

उमर भर तेरे ही गीत गाऊंगा,
छोड़ इंदोर कहीं नी जाऊंगा...
कसम तेरे को पोए-जलेबी की,
तू हओ कह दे वरना...
वैन के पीछे
'रीगल से टेसन-टेसन' चिल्लाऊंगा..!
साभार: तरुण नायक, इंदौर 

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