द लोन रेंजर: विकास के नाम पर लालच और विनाश की कहानी
ये कहानी है विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ने, उनकी जमीनों को हड़पने और जरूरत पड़े तो उनकी जिंदगी छीन लेने की। इस कहानी पर बनी फिल्म का नाम है 'द लोन रेंजर', जो साल 2013 में रिलीज हुई। गोर वरबिंसकी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जॉनी डेप और आर्मी हैमर प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
कहानी का समय वर्ष 1869 का है, जब अमेरिका के टेक्सास प्रांत के कॉल्बी गांव में रेल लाइन का काम चल रहा होता है। इसे विकास का नाम दिया जाता है और इसकी आड़ में इलाके में रहने वाले रेड इंडियन समुदाय के कोमांचे कबीले के लोगों को उजाड़ा जाता है।
टोंटो बने जॉनी डेप इसी कबीले से आते हैं। उसके कबीले को भी उजाड़ दिया जाता है। इन रेड इंडियन लोगों को उजाड़ने की असल वजह विकास नहीं बल्कि लालच होता है। इसी लालच में रेल लाइन बिछाई जाती है, अभिजात्य वर्ग और अधिक अमीर और शक्तिशाली बनकर गरीबों को लूट सकें।
इस बीच वकील बनकर जॉन रीड (आर्मी हैमर) अपने घर कॉल्बी लौटता हैं। जॉन को भाई डैन रीड (जेम्स बैज डेल) एक रेंजर (वन या फिर किसी गांव की रक्षा करने वाला) है। इन सबके बीच कॉल्बी गांव में एक खूंखार गुंडे बुच कैवेंडिश (विलियम फिचनर) के आतंक से सब परेशान होते हैं।
परिस्थितियां बदलती हैं तो जॉन को भी रेंजर बनना पड़ता है। और कैवेंडिश को गिरफ्तार करने की फिराक में रेंजर डैन मारा जाता है। इसके बाद जॉन टोंटो के साथ मिलकर विकास की आड़ में अभिजात्य वर्ग के लालच का पर्दाफाश करता है।
गोर वरबिंसकी की यह फिल्म भावनात्मक रूप से आपको जोड़ने के साथ टोंटो और जॉन के बीच की केमिस्ट्री से आपको बार-बार हंसने का मौका देती है। टोंटो बने जॉनी डेप की वेशभूषा फिल्म 'पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन' के कप्तान जैक स्पैरो से काफी मेल खाती है। उनका अभिनय तो कमाल होता ही है।
हॉलीवुड की तकनीक बेमिसाल है। आज के दौर में भाप का इंजन, मीटर गेज रेल लाइन का निर्माण दिखाना आश्चर्य से भर देता है। और भाप के इंजन पर फिल्माया गया एक्शन इतना कमाल का है कि लगता है आप उसी दौर में पहुंच गए हैं।
ये सब इस फिल्म को मस्ट वॉच बना देते हैं। लोन रेंजर एक काल्पनिक किरदार है। इस पर साल 1915 में जेन ग्रे ने 'द लोन स्टार रेंजर' नाम की किताब लिखी थी। इस किरदार पर सबसे पहले 1933 में अमेरिका में एक रेडियो शो बना था।








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