'ये है बकरापुर' का 'कोयलांचल' यहां देखिए 'मंजूनाथ', 'मस्तराम' और 'हवा हवाई' 'मिलियन डॉलर आर्म'


काफी दिनों बाद इस शुक्रवार एक साथ छह फिल्में रिलीज हुईं। इनमें से पांच तो बॉलीवुड और एक हॉलीवुड से हैं। हालांकि इस हॉलीवुड फिल्म पर भी बॉलीवुडिया छाप स्पष्ट है। इन फिल्मों के नाम हैं, 'मंजूनाथ: ईडियट था साला', 'मस्तराम', 'कोयलांचल', 'हवा हवाई', 'ये है बकरापुर' और हॉलीवुड की 'मिलियन डॉलर आर्म'। 'मिलियन डॉलर आर्म' में संगीत एआर रहमान का है और ये दो भारतीयों की सच्ची कहानी है।


खास बात ये है कि इनमें से अधिकांश फिल्में बॉयोपिक हैं। संदीप ए. वर्मा की 'मंजूनाथ: ईडियट था साला' आईआईएम लखनऊ से पासआउट आईओसी के तेजतर्रार  मार्केटिंग मैनजर मंजूनाथ षणमुगम के जीवन पर आधारित है। मंजूनाथ ने यूपी के लखीमपुर खीरी इलाके के तेल माफिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। 2005 में उनकी हत्या कर दी गई थी।


'मस्तराम' भारत के शायद पहले पोर्न राइटर मस्तराम पर आधारित है। मस्तराम कौन थे, कहां रहते थे ये कोई नहीं जान पाया, इसके बावजूद उन पर फिल्म बनाने का दुस्साहस अपने भोपाली युवा अखिलेश जायसवाल ने कर दिखाया। अखिलेश 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के दोनों भागों के अनुराग कश्यप के साथ सह लेखक रह चुके हैं।


'कोयलांचल' झारखंड के कोल माफिया को केंद्र में रखकर बनाई गई है। हालांकि ये स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन कहा जा रहा है कि आशु त्रिखा की ये फिल्म बिहार के बाहुबली सांसद सूरजभान सिंह पर आधारित है। कारण फिल्म के मुख्य किरदार का नाम सरयूभान सिंह रखा गया है, जिसका रोल विनोद खन्ना ने निभाया है।


युवाओं के इस देश में 'हवा हवाई' जैसी बच्चों की फिल्म बनना सुखद है। इसे पेश किया है निर्देशक अमोल गुप्ता ने जो इससे पहले बच्चों को फिल्म 'स्टैनली का डब्बा' तोहफे में दे चुके हैं। फिल्म 'तारे जमीं पर' में भी उन्होंने सहयोग किया था। यह एक बच्चे और स्केटिंग को लेकर उसके जुनून की कहानी है। अमोल के बेटे पार्थो ने यह किरदार निभाया है।


जानकी विश्वनाथ की फिल्म 'ये है बकरापुर' ग्रामीण भारत पर एक सामाजिक व्यंग्य है। यह एक बकरे की कहानी है, जिसका नाम 'शाहरूख' होता है। हालांकि निर्देशक के अनुसार अभिनेता शाहरूख खान से इसका कोई संबंध नहीं है। यह बकरा उस गांव में बहुत प्रसिद्ध है। फिल्म जटिल ग्रामीण विश्वासों और परंपराओं पर आधारित है।


क्रेग गिलेस्पी की यह फिल्म 'मिलियन डॉलर आर्म' दो भारतीय बेसबॉल पिचर (बेसबॉल गेंद फेंकने वाले खिलाड़ी ताकि खेल फिर से शुरू हो सके) रिंकू सिंह और दिनेश पटेल की सच्ची कहानी है, जिनकी खोज  एक खेल प्रतिनिधि ने की थी। 'लाइफ ऑफ पाई' में नजर आ चुके सूरज शर्मा रिंकू बने हैं और 'स्लमडॉग मिलेनियर' में नजर आए मधुर मित्तल दिनेश बने हैं।

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