जूते की अभिलाषा...
लल्लन पाड़े पढ़िन...
अब तुम पढ़ौ...
'ओम वर्मा' की लिखी दो अनूठी,
अद्भुत, असाधारण, बुनियादी कविताएं...
चाह नहीं मैं विश्व सुंदरी के पग में पहना जाऊं
चाह नहीं शादी में चोरी हो साली को ललचाऊं
चाह नहीं अब सम्राटों के चरणों में डाला जाऊं
चाह नहीं अब बड़े मॉल में बैठ भाग्य पर इठलाऊं
मुझे पैक करना तुम बढ़िया, उसके मुंह पर देना फेंक
चले शान से वोट मांगने, आज बेच जो अपना देश।
मतवाला...
अपना मत देने को घर से
चलता है मत देने वाला
किसको दूं, क्यों दूं
असमंजस में भोला भाला
ख्वाब दिखाते हैं सब ढेरों
पर मैं सच बतलाता हूं
इसको दे या उसको दे तू
सभी करेंगे घोटाला।
साभार: ओम वर्मा
अब तुम पढ़ौ...
'ओम वर्मा' की लिखी दो अनूठी,
अद्भुत, असाधारण, बुनियादी कविताएं...
चाह नहीं मैं विश्व सुंदरी के पग में पहना जाऊं
चाह नहीं शादी में चोरी हो साली को ललचाऊं
चाह नहीं अब सम्राटों के चरणों में डाला जाऊं
चाह नहीं अब बड़े मॉल में बैठ भाग्य पर इठलाऊं
मुझे पैक करना तुम बढ़िया, उसके मुंह पर देना फेंक
चले शान से वोट मांगने, आज बेच जो अपना देश।
मतवाला...
अपना मत देने को घर से
चलता है मत देने वाला
किसको दूं, क्यों दूं
असमंजस में भोला भाला
ख्वाब दिखाते हैं सब ढेरों
पर मैं सच बतलाता हूं
इसको दे या उसको दे तू
सभी करेंगे घोटाला।
साभार: ओम वर्मा

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