मार्केज के गल्प जैसा क्रिस लिन का कैच
खेलों में क्रिकेट मुझे सबसे ज्यादा पसंद हैं, बाकी खेलों की मुझे ज्यादा समझ नहीं है। हालांकि अब जबसे नौकरी लगी तब से क्रिकेट से नाता नामंजूर होता जा रहा हैं। अब क्रिकेट देखता नहीं सिर्फ पढ़ता हूं। आगे की जो लाइनें है वो मेरी नहीं, बल्कि क्रिकेट समीक्षक 'अयाज मेमन' की हैं। उम्मीद है कि आपको पसंद आएंगी।
आईपीएल की बात करें तो दो चीजें मेरे जेहन में अब भी ताजा हैं। एक, बैंडन मैक्कुलम की 158 रन की पारी और दूसरा क्रिस गेल की 66 गेंदों पर 175 धुंआधार रन। थोड़ी झिझक के साथ मैं ये स्वीकार करूंगा कि गेंदबाजी का ऐसा कोई प्रदर्शन मुझे याद नहीं आता है। लेकिन इन यादों में क्रिस लिन का हालिया कैच जुड़ गया है।
लिन का डिविलियर्स का कैच लेना और बेंगलुरू से मैच छीन लेना सनसनीखेज था। उसने कैसे फिसलने के बाद खुद को संभाला, फिर पीछे की छलांग लगाया, बाउंड्री के बाहर जाती गेंद को लपका और फिर आश्चर्यजनक तरीके से अपने पूरे शरीर को बाउंड्री लाइन के भीतर ले आया। (जिन्होंने यह कैच नहीं देखा वे इस लिंक पर इसे दोबारा देख सकते हैं, http://tinyurl.com/mqst6ul या फिर http://www.businessinsider.in/This-Is-Being-Called-One-Of-The-Best-Catches-In-Cricket-History/articleshow/34209433.cms)
आपने जिमनास्टिक या डाइविंग इवेंट में ऐसे करतब जरूर देखे होंगे जिसके लिए अगल तरह के प्रशिक्षण की जरूरत होती है लेकिन क्रिकेट में ऐसा कभी नहीं देखा होगा। कुछ लोगों ने कीनू रीव्स की 'मैट्रिक्स' में ऐसे स्टंट देखे होंगे लेकिन फिल्मों के ऐसे दृश्य तकनीकी मदद से फिल्माए जाते हैं।
यह कैच तो आसाधारण था। चूंकि मैं इसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता इसलिए मैंने फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट की है। और इसे 'जादुई यथार्थवाद' करार दिया जो गैब्रियल गार्सिया मार्केज के गल्प जैसा ही था।
इस पोस्ट पर डॉ. सिद्धार्थ दागली ने एक दिलचस्प प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, 'रीढ़ की हड्डी को हवा में क्षमता से अधिक पीछे की ओर खींचना और फिर शरीर का पूरा वजन दाहिनी कोहनी पर डालकर कैच लेना! मेडिकल साइंस के अनुसार यह बड़ा पेंचीदा मामला है।'
यह सच है कि कैच देखकर चिकित्सा जगत भी विस्मित है। यह कैच देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्रिकेट में फिटनेस का महत्व किस कदर बढ़ा है। मैं अब हैरान हूं कि क्या अब कैच फील्डिंग का नया मानक बनेगा...?
लिन का कैच दिलचस्प और विरोधाभासी भी है। क्योंकि इस टूर्नामेंट में अभी तक फील्डिंग का स्तर काफी नीचे रहा है। अभी 12 मैंचों में करीब 50 कैच छोड़े गए हैं। इनमें से कुछ बेहद आसान थे और वार्नर, पोलार्ड और मनोज तिवारी जैसे बेहतरीन फील्डरों द्वारा टपकाए गए।
साभार: अयाज मेमन, क्रिकेट समीक्षक








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