तुम्हारा स्थान रिक्त है, रिक्त ही रहेगा
वक्त हर जख्म
को भर देता है
वक्त हर दर्द को
हर लेता है
विरह की आग में
जलती रूह को
मरहम बन के वक्त
सुकून देता है।
बारिश थम चुकी है
सूरज निकल पड़ा है
धरती रोशना गई है
फूल टहकने लगे हैं।
प्यार और फर्ज
निभाने में हुई
चूक पर-
काहे का रोना है।
बिछड़े हुए दोस्त
उस छोर पर
प्रतीक्षारत हैं।
तुम्हारे विदा होने पर
न कोई शोक में
व्याकुल होकर
आंसू बहाएगा
न प्रार्थना में कोई
सिर झुकाएगा,
न कोई तुम्हारी
क्षति अनुभव करेगा।
बस तुम जहां थे
वहां नहीं हो-
तुम्हारा स्थान रिक्त है
रिक्त ही रहेगा।
एलिस मुनरो
साहित्य के लिए नोबल पुरस्कार प्राप्त (2013)


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