देश में जनता की हालत नौकरों से भी बदतर


शनिवार को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, 'मैं जनता का नौकर हूं और जनता के लिए काम करता हूं।' उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है यह एन. रघुरमन के इस लेख से आसानी समझा जा सकता है। इसमें तीन कहानियां हैं। दो कहानियां बताती हैं कि देश में राजीव गांधी से लेकर राहुल गांधी तक कुछ नहीं बदला। तीसरी कहानी एक सबक है, जो अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से राहुल गांधी और उनके जैसे तमाम नेता ले सकते हैं। राहुल भले ही कहें कि वह जनता के नौकर हैं, मगर सच ये है कि देश में जनता की हालत उनके नौकरों से भी बदतर है। 

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