तो बल पड़ता है दरिया में...


घनेरे काले जंगल में,
किसी दरिया की आहट
सुन रहा हूं मैं...
कभी तुम नींद में करवट
बदलती हो...
तो बल पड़ता है दरिया में...
गुलजार 

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