गानों के गुल्लक गुलजार...
आजा-आजा दिल निचोड़ें
रात की मटकी तोड़ें
कोई गुडलक निकालें
आज गुल्लक तो फोड़ें...
हे तिल-तिल तारा मेरा तेली का तेल
कौड़ी-कौड़ी पैसा यार पैसे का खेल
चल-चल सड़कों पे होगी ढैन-ढैन
ढैन टे नैन टे ने ने...
आजा के वन वे है ये जिंदगी की गली
एक ही चांस है,
आगे हवा ही हवा है अगर सांस है
तो ये रोमांस है
ये ही कहते हैं, ये ही सुनते हैं
जो भी जाता है जाता है,
वो फिर से आता नहीं...
कोई चाल ऐसी चलो यार अब कि
समंदर भी पुल पर चले
फिर तू चले उस पे या मैं चलूं
शहर हो अपने पैरों तले
कहीं खबरें हैं, कहीं कबरें हैं
जो भी कबरों में सोए हैं उनको जगाना नहीं
आजा-आजा दिल निचोड़ें
रात की मटकी तोड़ें
कोई गुडलक निकालें
आज गुल्लक तो फोड़ें...
हे तिल-तिल तारा मेरा तेली का तेल
कौड़ी-कौड़ी पैसा यार पैसे का खेल
चल-चल सड़कों पे होगी ढैन-ढैन
ढैन टे नैन टे ने ने...
फिल्म: कमीने (2009)
गीत: गुलजार
आज ही जयप्रकाश चौकसे का लेख पढ़ा। उनके अनुसार सिनेमा 101 साल का हो चला है और उसमें 55 साल गुलजार के हैं। वह लगातार 55 सालों से सिनेमा उद्योग में सक्रिय हैं। यहां गुलजार ही एक मात्र ऐसे गीतकार हैं जिनके लेखन में गंभीरता झलकने के साथ वह खिलंदड़पना भी झलकता है, जो आपने झूमने पर मजबूर कर देता हैं।
वहीं एकमात्र ऐसे गीतकार हैं, जो दिल का मिजाज इश्किया... ना बोलूं मैं तो कलेजा फूंके, जो बोल दूं तो जबां जले है.. जैसे गीत लिखने के साथ दिल तो बच्चा है जी... और हॉर्न ओक प्लीज जैसे गाने लिख सकते हैं। असल मायनों गुलजार ही गानों के गुल्लक हैं। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार देना पूरी फिल्मोद्योग का सम्मान करने जैसा है।





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