रामसे ब्रदर्स की परंपरा को आगे बढ़ातीं एकता कपूर


रागिनी एमएमएस सीरीज की दूसरी फिल्म का कॉन्सेट है हॉरर के साथ दशर्कों को सेक्स परोसना। ऐसी फिल्मों को 'हॉरेक्स मूवी नाम दिया गया है। हमारे यहां ये कॉन्सेप्ट नया नहीं है। 90 के दशक में रामसे ब्रदर्स वीराना, पुरानी हवेली जैसी फिल्मों के सहारे हॉरेक्स मूवी की नींव रखी थी।
उस जमाने में रामसे ब्रदर्स की फिल्में बी ग्रेड फिल्मों की श्रेणी में रखा जाता था और आज जब एकता कपूर ऐसी ही फिल्में बना रहीं हैं तो उनकी फिल्म को ए ग्रेड (एडल्ट श्रेणी के अलावा)की श्रेणी में रखी जाती हैं। रागिनी एमएमएस और रागिनी एमएमएस 2 जैसी फिल्में बनाकर एकता रामसे ब्रदर्स की परंपरा को ही आगे बढ़ा रही हैं।

 
भारतीय भूतिया फिल्मों के साथ दिक्कत ये है कि इस क्षेत्र में रिसर्च की कमी है। या यूं कहें तो ढंग से रिसर्च ही नहीं की गई है। भूतों के बारे में जो सीमित जानकारी हमारे पास है उसके अनुसार भूत एक प्यासी आत्मा होता या होती है। जिसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है। फिर उसकी मौत हो जाती है और वह सबके खून का प्यासा हो जाता या जाती है। निर्देशकों से अनुरोध है कि यार अपने ज्ञान को थोड़ा सा तो विस्तार दो। कुछ अलग करके तो दिखाओ।एक बात स्त्रीवादियों के ध्यान में लाना चाहूंगा। वह ये है कि अधिकांश भूत महिलाएं ही क्योंकि होती हैं। विक्रम भट्ट की 2002 में आई फिल्म राज से भूतिया फिल्मों को नई गति मिली थी। इसमें एक महिला भूत थी। रामगोपाल वर्मा की 2003 में आई भूत फिल्म में भी महिला भूत थी। शुक्र है फिल्म 1920 और 1920 इविल रिटर्न का इसमें पुरुष भूत हैं, मगर ये महिलाओं के शरीर पर ही कब्जा करते हैं। कहीं ये स्त्रियों की छवि खराब करने की साजिश तो नहीं है।


 खैर रागिनी एमएमएस 2 में आपका सामना एक परंपरागत मराठी महिला भूत से होता है, जिसका मानना है कि वह चुड़ैल नहीं और उसने अपने बच्चों को नहीं मारा, लेकिन उसके गांव वाले उसे चुड़ैल मानकर जिंदा जला देते हैं। इसके बाद वह अपने शानदार घर में आने वाले किसी भी जिंदा मेहमान को मुर्दा बनाने के काम में लग जाती है।इस फिल्म में अब तक अच्छी खासी कमाई कर ली है मगर इसमें काफी झोल है। फिल्म में रागिनी एक एमएमएस स्कैंडल पर फिल्म बनाने की घोषणा की जाती है। फिल्म के कू्र का एक सदस्य शूट से एक रात पहले वहां पहुंचता है। भूत उसे मार देती है, मगर कू्र का कोई सदस्य उसकी खोज खबर नहीं लेता है।

कू्र एक बार रात में शूटिंग करने का फैसला लेती है। एक महिला सदस्य को शूटिंग से संबंधित कुछ सामान लाने के लिए भेजा जाता है और भूत उसे मार देती है। उसकी भी कोई खोज खबर नहीं ली जाती। कुछ समय बाद पैकअप हो जाता है और फिल्म का निर्देशक अभिनेत्री सनी लियोन के कमरे में 'मजा करने के लिए पहुंच जाता है। इसी तरह कू्र के दो सदस्यों को भूत नहीं मारती है और उन्हें फिल्म से अचानक गायब कर दिया जाता है।
इस फिल्म में तारीफ के लायक बस दो गाने हैं। पहला ये दुनिया ये दुनिया पित्तल दी, ये दुनिया पित्तल दी, बेबी डॉल मैं सोने दी... और दूसरा हनी सिंह का चार बोतल वोदका काम मेरा रोज का, ना कोई मुझको टोकता, ना किसी ने टोका...। और शायद ये पहली बार है जब कोई वास्तविक जीवन का किरदार मतलब सनी लियोन उसी नाम से पूरी फिल्म में नजर आया हो। आमतौर पर किसी फिल्म में सलमान या कोई और अभिनेता अपने वास्तविक रूप में अतिथि भूमिका में ही नजर आता है। बहरहाल उम्मीद है कि ऐसी फिल्म बनाने वालों को भगवानजी थोड़ी सदबुद्धि देंगे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

असली मस्तराम की तलाश

हैप्पी फीट: मछली की तरह तैरने वाला पक्षी पेंग्विन