खुशवंत सिंह: जिस्म बूढ़ा है, आंखें बदमाश और दिल अब भी जवां...

वरिष्ठ लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह का निधन 20 मार्च को हो गया। पिछली साल की शुरुआत में मैंने उनकी बेहतरीन किताबों में से एक 'ट्रेन टू पाकिस्तान' पढ़ी थी। पढ़ने का जरिया मित्र शिवम शुक्ला बने। किताबें पढ़ने के मामले में मैं बहुत आलसी हूं, मगर शिवम की सलाह पर मैंने यह लाजबाज किताब एक हफ्ते के भीतर पढ़कर खत्म कर दी। खुशवंत सिंह व्यक्तित्व के मामले में जैसे बेबाक थे वैसे ही लेखन में भी। उनके चुटकुले याद आएंगे...


Courtecy: दैनिक भास्कर 

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