क्वीन: खुद को खोजने की यात्रा
विकास बहल की निर्देशित फिल्म क्वीन एक खोज यात्रा है... खुद को खोजने की यात्रा। जानने, समझने और परखने की यात्रा। ये फिल्म बताती है कि जीवन रुकने का नाम नहीं। जीवन चलने का नाम है। इस सफर पर तमाम लोग आपसे मिलते-बिछड़ते हैं, मगर किसी के बिछड़ने से जीवन रुकता नहीं।
बिछड़ना बड़ी बात नहीं होती, बड़ी बात होती है हमेशा जुड़े रहना। जिंदगी को पहाड़ चढ़ने जैसा नहीं बनाना चाहिए। यह तो उत्सव है, इसे मनाना चाहिए... इसका मजा लेना चाहिए। ये फिल्म उन लोगों के लिए सबक है जो जिंदगी में तो काफी आगे बढ़ गए हैं, लेकिन उनका दिल-दिमाग अब भी सालों पीछे किसी और शहर और किसी से अटका हुआ है। इसका ये कतई मतलब नहीं कि हम अतीत को भुला दें। अतीत को भूलना नहीं चाहिए, मगर अतीत में जीना गलत बात है।
फिल्म में मंगेतर के शादी से मना कर देने के बाद दिल्ली की रानी उर्फ क्वीन (कंगना रनौत) अपने हनीमून ट्रिप पर अकेले पेरिस निकलती है। पेरिस और एम्सटर्डम की यात्रा उसे नए लोगों से मिलाती है। इस बीच उसे अपनी अहमियत का पता चलता है। बाकी तो हम भारतीय हैं, जहां भी जाते हैं वहां छा जाते हैं।
जय माता दी...



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