ध्यानचंद की अमर चित्र कथा
कथा तो ये पुरानी है मगर है तो अब भी। पुरानी होकर भी ये लगती है सुहानी। इस बार अगस्त में हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की जयंती पर अमर चित्र कथा की ओर से उनके चाहने वालों को एक नायब तोहफा दिया गया। 'ध्यानचंद: द विजार्ड ऑफ़ हॉकी' नाम से एक कॉमिक्स अंग्रेजी में लॉन्च की गई।
यह पहला मौका है जब अमर चित्र कथा ने किसी खिलाड़ी को इस तरह से याद किया है। ध्यानचंद ने 1928 से लेकर 1936 के बीच ओलंपिक में भारत को तीन गोल्ड मेडल दिलाए थे। अमर चित्र कथा की सम्पादक रीना पुरी के अनुसार ध्यानचंद युवाओं के रोल मॉडल हैं। युवा तो उनसे परिचित हैं। बच्चों को उनसे परिचित करने के लिए अमर चित्र कथा ने यह कदम उठाया है।



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