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रात अकेली है: मर्डर मिस्ट्री में प्रेम को बेवजह थोपने की कोशिश

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बॉलीवुड वालों का मोह प्रेम से कभी भंग नहीं हो पाता. मर्डर मिस्ट्री भी दिखाएंगे तो उसमें प्रेम को बिना वजह दर्शकों पर थोपने की कोशिश करेंगे. नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी और राधिका आप्टे की फिल्म रात अकेली है इसी का उदाहरण है. फिल्म में शुरुआत में ही पता चल जाता है कि फिल्म का निर्देशक आपको क्या दिखाना चाहता है. मर्डर मिस्ट्री कहीं पीछे छूट जाती है, प्रेम पूरी फिल्म पर प्रगाढ़ होता नज़र आता है. हत्या की जांच भी इस तरह से दिखाई गई है, जो सिर्फ़ नवाज़ ही समझते हैं और एक नतीजे पर पहुंचते हैं कि हत्यारा कौन है. आख़िर में वो प्रवचन टाइप बता देते हैं कि कौन हत्यारा है. हालांकि फिल्म के कलाकारों की अभिनय के लिए तारीफ़ की जा सकती है, लेकिन कहानी कमज़ोर हो तो इस तरफ़ ध्यान भी नहीं जाता. मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि अपराध आधारित कोई फिल्म बनाने से पहले क्राइम पेट्रोल के पुराने एपिसोड होम वर्क के तौर पर देखने चाहिए. अभी तो क्राइम पेट्रोल के साइकिल की चेन भी उतर चुकी है और उसकी टीम पता नहीं क्यों बेवजह पैडल मारे जा रही है. क्राइम पेट्रोल में भी अपराध के साथ प्रेम दिखाते थे, लेकिन प्रेम कभी अपराध की जांच पर हावी नह...

शी वेब सीरीज़: बनाने से पहले थोड़ा और विचार करना था

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जहां पुलिस इस बात के लिए बदनाम हो कि किसी से भी कोई भी जुर्म कुबूल करवा सकती है, वहां शी (SHE) जैसा वेब सीरीज़ बनाने से पहले थोड़ा और सोच विचार कर लेना चाहिए था. ने​टफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज़ इस वेब सी​रीज़ में नशे के व्यापार में शामिल एक अपराधी से जानकारी निकलवाने के लिए क्राइम ब्रांच एक लेडी सब इंस्पेक्टर को आगे कर देती है, क्योंकि वह सिर्फ उसी को जानकारी देने की शर्त रख देता है. और वो अपराधी जानकारी देने के नाम पर उस महिला सब इंस्पेक्टर को ही एक्सप्लॉएट करने वाली भद्दी- भद्दी बातें करता है. अपराधी के पकड़ में आने के बाद ऐसा प्रयोग और अपराधी को पुलिस द्वारा ऐसी सुविधा दिए जाने का उदाहरण शायद ही कहीं मिले. सोचता हूं कि जब ऐसे आइडिया पर वेब सीरीज़ बनाने की चर्चा होती होगी तो क्या होता होगा? शायद सभी उस आइडिया को लेकर बिना कुछ सोचे एक साथ बोल देते होंगे, एक्सीलेंट...